यूपी के रिकॉर्ड में जिंदा हुआ ‘अजमल कसाब’; प्रशासन में हड़कंप, लेखपाल निलंबित

मुंबई हमले 26/11 के दोषी अजमल कसाब को 21 नवंबर 2012 को फांसी दे दी गई

लेकिन उत्तर प्रदेश के ओरैया जिले के प्रशासन के रिकॉर्ड पर यदि यकीन करें तो दुर्दांत आतंकवादी कसाब अभी जिंदा है और उसके नाम से निवास प्रमाण-पत्र जारी होने का मामला सामने आया है।

मामला सामने आने के बाद प्रशासन में हड़कंप मच गया और कसाब को निवास प्रमाण-पत्र जारी करने वाले लेखपाल को निलंबित कर दिया गया है। बता दें कि कसाब को महाराष्ट्र के यरवदा जेल में छह साल पहले फांसी दी जा चुकी है।

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक मामले की गंभीरता को देखते हुए जिले के अधिकारियों ने प्रारंभिक स्तर की जांच करने के बाद कसाब को जारी निवास प्रमाण-पत्र रद्द करने के साथ ही संबंधित लेखपाल को निलंबित कर दिया है।

अधिकारियों ने मामले की जांच के आदेश दिए हैं। मामले की जांच कर रहे एसडीएम बिधूना प्रवेंद्र कुमार ने टीओआई को बताया कि अजमल कसाब के नाम से एक निवास प्रमाण-पत्र जारी किया गया था।

उन्होंने बताया कि किसी अज्ञात व्यक्ति ने फर्जी दस्तावेजों के आधार पर ऑनलाइन आवेदन किया था

एसडीएम ने कहा, ‘बिधूना तहसील में अक्टूबर महीने में किसी अज्ञात व्यक्ति ने निवास प्रमाण-पत्र के लिए आतंकवादी अजमल कसाब की तस्वीर के साथ आवेदन किया था।

इसके बाद अधिकारियों ने तथ्यों की जांच किए बगैर 21 अक्टूबर को उसके नाम से निवास प्रमाण-पत्र जारी कर दिया।’

Ajmal Kasab

रिपोर्ट के मुताबिक निवास प्रमाण पत्र में कसाब का जन्म स्थान बिधूना बताया गया है और माता-पिता के नाम क तौर पर मुमताज बेगम एवं मोहम्मद आमिर के नाम दर्ज हैं।

निवास प्रमाण-पत्र पर पंजीयन संख्या 181620020060722 दर्ज है।

एसडीएम ने बताया कि इस अनियमितता के लिए जांच के आदेश दे दिए गए हैं। उन्होंने कहा, ‘जांच में अनियमितता मिलने पर हमने तहसील कार्यालय में तथ्यों की जांच की। हमने पाया कि उसमें दिया गया पता फर्जी है।

हमारे अनुरोध पर राष्ट्रीय सूचना केंद्र (एनआईसी) ने उसका निवास प्रमाण-पत्र रद्द कर दिया है।’ अधिकारी ने बताया कि जिस लेखपाल के सत्यापन रिपोर्ट पर निवास प्रमाण-पत्र जारी किया गया था, हमने उस संबंधित लेखपाल को निलंबित कर दिया है।

गौरतलब है कि पाकिस्तान से समुद्र मार्ग से मुंबई में दाखिल हुए 10 आतंकवादियों ने आर्थिक राजधानी पर कहर बरपाया था। आतंकवादियों के इस हमले में 166 लोगों की मौत हुई थी जबकि सैकड़ों लोग घायल हुए।

सुरक्षाबलों की कार्रवाई में सभी आतंकवादी मारे गए जबकि अजमल कसाब जिंदा पकड़ा गया। कसाब पर मुकदमा चलाए जाने के बाद उसे 21 नवंबर 2012 को फांसी की सजा दी गई।

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